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Posts Tagged ‘mankind’

आँखें खोलता हूँ तो कोहराम सा नज़र आता है ,

(as I open my eyes, I see chaos)

आवाजें हैं , दर्द का एहसास है ,

(there are painful voices and experiences all around)

बिखरे हुए सपनों का तूफ़ान सा नज़र आता है ।

(and I see a storm of shattered dreams) 

हर नए साल में खुशियाँ हों , उजाले हों हर इंसान में ,

(I wish there is happiness this new year, and joy for everyone)

पर उन आवाजों और सपनों को भी सवारना ,

(but take care of some of those voices and dreams)

बना सको तो एक जीवन को बना लेना तुम ,

(and make an effort to make up someone’s life)

नहीं तो इंसान का भविष्य सूना सा नज़र आता है ।।

(otherwise the future of mankind will be full of emptiness)

@saxenaas 2012

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