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Posts Tagged ‘society’

दर्द हुआ आवाज़ों में

लहू निकला बाज़ारों में

शोर हुआ शमशानों में

एक और नाम गया किताबों में ।

 

एहसास हुआ इंसानों को

पर काटा भी इंसानों ने

बैर लगा इतिहासों को

पर लाल रंग ही था दरारों में ।

 

एक गिरा तो और उठ आये

कोई कमी नहीं हथियारों में

सूखी आँखें अब भी हैं आस लगाये

पर कोई शिकवा नही इन कतारों में ।

 

थामे जज़बाद कुछ जवानों ने

आवाज़ लगाई दीवानों ने

मैंने लफ्ज़ उतारे हैं किताबों में

तुम इंसानियत का जज़बा उतार दो इंसानों में ॥

 kanchan

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dedicated to all the women in India who are subject to societal, cultural and religious atrocities. 


indian-women_marriage-educationएक नर की नारी हूँ मैं

नरों ने अस्तितिव बनाया यह

युगों युगों से अबला हैं मुझको कहते

दबे दबे से मेरे अरमां मुझमे है रहते |

 

शीश झुका सबको संभाला

उनके रंगों में खुद को ढाला

कलम किताबों में देवी बनाया

पर मेरे जीवन में वोह पल ना आया |

 

कुछ युगों में उठी , फिर भुला दिया

मेरी कहानी को इतिहास में दबा दिया

और दहलीज़ जब लांघ कर आई

एक किरण थी हाथों में पर खुद को अकेला पाई |

 

आज जब आईने में देखा खुद को

तेज़ प्रताप नज़र आया मुझको

मैं हूँ शक्तिशाली

नही मैं अब नर की नारी |

 

कोई दहलीज़ नहीं , यह जग है मेरा

तुमसे मिला वक़्त , अब है मेरा

जाग्रित हूँ , साहस है , नए युग का है एहसास

अब मैं मैं हूँ , यह है मेरी आवाज़ ||

Emancipation of women

Top right picture courtsey: http://visualmantra.wordpress.com 

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